जब बर्बरीक ने अर्जुन को चुनौती दी, तो श्रीकृष्ण ने क्या फैसला लिया?

01 Jan, 2025

Manoj Yadav

बर्बरीक ने अर्जुन को चुनौती दी कि वह एक क्षण में कौरव सेना को नष्ट कर देगा.

बर्बरीक पूर्वजन्म में सूर्यवर्चा नामक यक्षराज था, जो पृथ्वी का भार उतारने के लिए भगवान श्रीकृष्ण से श्रापित हुआ.

एक बार, पृथ्वी गौमाता के रूप में देवताओं से प्रार्थना करने आई, तब ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी का भार उतारने का अनुरोध किया.

सूर्यवर्चा ने दावा किया कि वह अकेला ही अवतार लेकर सभी दैत्यों का संहार कर देगा.

ब्रह्माजी ने सूर्यवर्चा को कुपित होकर श्राप दिया कि जब पृथ्वी का भार उतारने के लिए युद्ध होगा, तो भगवान श्रीकृष्ण उसे नष्ट कर देंगे.

सूर्यवर्चा ने भगवान से प्रार्थना की कि उसे ऐसी बुद्धि मिले, जो सभी अर्थों को सिद्ध करे, और भगवान ने उसे यह वर दिया.

महाभारत के युद्ध के समय बर्बरीक ने अर्जुन की प्रतिज्ञा का विरोध किया और दावा किया कि वह एक क्षण में कौरव सेना को समाप्त कर देगा.

श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से पूछा कि वह कौरव सेना को कैसे एक क्षण में नष्ट करेगा, तो बर्बरीक ने एक खास बाण का प्रयोग किया.

बर्बरीक ने एक बाण छोड़ा जिसमें लाल भष्म भरी थी, और वह भष्म दोनों सेनाओं के मर्मस्थलों पर गिर गई.

बर्बरीक ने दावा किया कि वह दूसरे बाण से सभी योद्धाओं को मौत के घाट उतार देगा, और किसी को भी शस्त्रधारण नहीं करने दिया.

भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के अत्यधिक अभिमान को देखा और कुपित होकर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया.

बर्बरीक का सिर अलग होने के बाद देवी अम्बिका प्रकट हुईं और उसने बर्बरीक के मस्तक को अमृत से सींचा.

अम्बिका के वरदान से बर्बरीक का मस्तक जीवित हुआ, और उसने युद्ध देखने की प्रार्थना की. भगवान श्रीकृष्ण ने उसे पर्वत पर स्थापित कर दिया.

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