रावण ने क्यों लिखा था श्रीराम को पत्र?
रामायण की कहानी के अनुसार रावण ने माता सीता का हरण करके घोर पाप किया था. सीता को वापस पाने के लिए श्रीराम ने वानरों की सेना की मदद से लंका पर आक्रमण किया.
भगवान राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध और इस युद्ध में रावण की मृत्यु हुई. जिसके बाद माता सीता को लंका से वापस लाया गया.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बीच रावण ने प्रभु श्रीराम को पत्र भी लिखा था. लेकिन युद्ध के बीच में आखिर रावण ने पत्र में ऐसी क्या बात लिखी थी?
प्रभु राम और रावण के बीच दिन में युद्ध होता था और रात्रि में सभी अपने—अपने स्थान पर चले जाते थे. इस बीच द्वीत नामक वानर चुपचाप लंका में प्रवेश करता था.
जब रात्रि के समय रावण भगवान शिव की अराधना करता था तब वानर द्वीत उसकी अराधना में खलल डालता था और उसे परेशान करता था.
रावण ने वानर द्वीत से काफी परेशान हो गया और फिर प्रभु श्रीराम को पत्र लिखकर उसकी शिकायत की. रावण ने पत्र में लिखा कि द्वीत वानर युद्ध समाप्त होने के बाद रात्रि में आकर शिव पूजा में विघ्न डालता है.
रावण ने पत्र में लिखा कि जब शाम को युद्ध समाप्त हो जाता है तो फिर ये वानर इस तरह उपद्रव क्यों मचा रहा है? यह युद्ध के नियमों के विरूद्ध है. इसका उत्पाद बंद कराएं.
जब भगवान राम को रावण का यह पत्र मिला तो उन्होंने द्वीत वानर को समझाया. लेकिन वह नहीं माना तो उसे वापस किष्किंधा भेज दिया गया.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता.
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