बैंकिंग में बड़ा बदलाव: अब 4 नॉमिनी और 10 साल तक का कार्यकाल, जानें नए बिल के खास प्रावधान

बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 ग्राहकों को 4 नॉमिनी नामांकित करने, 10 साल तक निष्क्रिय डिपॉजिट IEPF में ट्रांसफर करने और को-ऑपरेटिव बैंकों में डायरेक्टर्स का कार्यकाल बढ़ाने जैसे प्रावधानों के साथ पारदर्शिता व सुरक्षा बढ़ाएगा.

Updated: November 25, 2024 11:37 AM IST

By Manoj Yadav

बैंकिंग में बड़ा बदलाव: अब 4 नॉमिनी और 10 साल तक का कार्यकाल, जानें नए बिल के खास प्रावधान

Banking Amendment Bill: संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार से बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा की जाएगी. यह विधेयक ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने और बैंकिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी व लचीला बनाने का प्रयास है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक एक्ट, बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट और भारतीय स्टेट बैंक एक्ट में महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव करता है.

अब एक खाते में 4 नॉमिनी का प्रावधान

बिल का सबसे आकर्षक प्रावधान यह है कि अब बैंक खाता धारक एक के बजाय चार नॉमिनियों का नाम दे सकते हैं. खाता धारक नॉमिनियों को प्राथमिकता के आधार पर चुन सकते हैं या उनके हिस्से तय कर सकते हैं. प्राथमिकता वाले नॉमिनेशन के तहत, नॉमिनियों का अधिकार क्रम में लागू होगा, जैसे पहले, दूसरे, या तीसरे नॉमिनी की मृत्यु के बाद ही अगला नॉमिनी प्रभावी होगा.

यह बदलाव न केवल ग्राहकों को अधिक विकल्प देगा, बल्कि उनके फंड्स की सुरक्षा और वितरण को भी सुनिश्चित करेगा. यह प्रावधान लॉकर और सेफ कस्टडी के लिए भी लागू होगा.

अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स का उपयोग होगा सही दिशा में

विधेयक में 10 वर्षों तक निष्क्रिय बैलेंस, डिविडेंड, या एफडी को ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ के रूप में वर्गीकृत कर इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) में ट्रांसफर करने का प्रावधान है. इसका उद्देश्य बैंकों में निष्क्रिय निधियों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है.

को-ऑपरेटिव बैंकों में प्रबंधन को मिलेगा विस्तार

विधेयक के तहत को-ऑपरेटिव बैंकों के डायरेक्टर्स का कार्यकाल मौजूदा 8 साल से बढ़ाकर 10 साल किया जाएगा. हालांकि, चेयरमैन और होल-टाइम डायरेक्टर्स पर यह लागू नहीं होगा.

बैंकिंग नियमों में स्पष्टता और मजबूती

बैंक डायरेक्टरशिप में Substantial Interest की सीमा बढ़ाकर 5 लाख से 2 करोड़ रुपये कर दी गई है. इसके अलावा, रेगुलेटरी रिपोर्टिंग की समय-सीमा को हर महीने की 15वीं और अंतिम तारीख तक करने का प्रस्ताव है. यह कदम बैंकों की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाएगा.

बिल के प्रभाव और उद्देश्य

इस विधेयक का उद्देश्य ग्राहक सुविधाओं में सुधार, बैंकों की पारदर्शिता बढ़ाना और निष्क्रिय निधियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है. खासतौर पर, 4 नॉमिनी का प्रावधान ग्राहकों को अधिक विकल्प और सुरक्षा प्रदान करेगा.

गौरतलब है कि यह विधेयक भारत की बैंकिंग प्रणाली में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है. संसद के इस सत्र में इस विधेयक का पारित होना ग्राहकों और बैंकिंग क्षेत्र दोनों के लिए अहम होगा.

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