शेख हसीना की बढ़ीं मुश्किलें, बांग्लादेश की कोर्ट ने छात्रों की मौत मामले में जारी किया गिरफ्तारी वारंट

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने जुलाई-अगस्त प्रदर्शन के दौरान मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के सिलसिले में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 45 प्रमुख अवामी लीग नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.

Published: October 17, 2024 3:48 PM IST

By Tanuja Joshi

शेख हसीना की बढ़ीं मुश्किलें, बांग्लादेश की कोर्ट ने छात्रों की मौत मामले में जारी किया गिरफ्तारी वारंट

Sheikh Hasina Arrest Warrant: अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने गुरुवार (17 अक्टूबर) को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जो छात्रों के नेतृत्व वाली क्रांति के कारण सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत आ गई थीं. द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, हसीना के साथ, पूर्व मंत्रियों और अधिकारियों सहित 45 अन्य प्रमुख अवामी लीग नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. गिरफ्तारी वारंट जुलाई-अगस्त विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के संबंध में जारी किया गया है.

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के अध्यक्ष जस्टिस एमडी गोलम मुर्तुजा मजूमदार ने गुरुवार, 17 अक्टूबर को आदेश पारित किया. मुख्य अभियोजक मुहम्मद ताजुल इस्लाम ने द डेली स्टार को बताया कि यह फैसला अभियोजन पक्ष की तरफ से न्यायाधिकरण में दो याचिकाएं दायर करने के बाद आया है, जिसमें उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग की गई थी.

कोर्ट ने लगाए गंभीर आरोप

बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, ‘अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की गिरफ्तारी और उन्हें 18 नवंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है. शेख हसीना जुलाई से अगस्त तक नरसंहार, हत्याएं और मानवता के खिलाफ अपराध करने वालों की मुखिया थीं.’

ट्रिब्यूनल के सूत्रों के अनुसार, विशेष रूप से पूर्व मंत्री ओबैदुल कादर, असदुज्जमान खान कमाल, हसन महमूद और अनीसुल हक उन 46 नेताओं में से हैं जिनकी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप में शेख हसीना और उनकी पार्टी के सदस्यों के खिलाफ अपराधों की 60 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं. सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय अपराध (न्यायाधिकरण) अधिनियम-1973 में संशोधन के लिए एक मसौदा भी तैयार किया है.

शेख हसीना ने 5 अगस्त, 2024 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और एक सैन्य विमान से भारत चली गई थीं. जुलाई के मध्य से शुरू हुई सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ बांग्लादेश की छात्र क्रांति में अपदस्थ होने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है.

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