जम्मू-कश्मीर के गांव में फैली 'रहस्यमयी' बीमारी, अब तक 8 लोगों की मौत, सरकार ने बुलाए एक्सपर्ट

Jammu Kashmir Mysterious Disease: मृतकों की संख्या को देखते हुए अधिकारियों ने मामले की जांच में सहायता के लिए विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम गठित की है.

Published: December 19, 2024 9:39 AM IST

By Gaurav Barar

जम्मू-कश्मीर के गांव में फैली 'रहस्यमयी' बीमारी, अब तक 8 लोगों की मौत, सरकार ने बुलाए एक्सपर्ट

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में रहस्यमय बीमारी से बुधवार को अस्पताल में एक और बच्चे के दम तोड़ने के साथ अज्ञात बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है. वहीं, अधिकारियों ने प्रभावित गांव में मामलों और मौतों की जांच में सहायता के लिए विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम गठित की है.

अधिकारियों ने बताया कि जांच में तेजी लाने और बीमारी की पहचान करने के लिए राजौरी में प्रयोगशाला की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि मोहम्मद रफीक के 12 वर्षीय बेटे अशफाक अहमद की छह दिन तक जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में भर्ती रहने के बाद मौत हो गई.

मरने वालों की संख्या हुई आठ

अधिकारियों ने बताया कि अशफाक को पहले इलाज के लिए चंडीगढ़ भेजा गया था, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी. अशफाक के छोटे भाई-बहन-सात वर्षीय इश्तियाक और पांच वर्षीय नाजिया की पिछले बृहस्पतिवार को मौत हो गई. अशफाक की मौत के साथ ही कोटरंका तहसील के बधाल गांव में मरने वालों की संख्या आठ हो गई है.

सभी मृतक एक ही गांव के दो परिवारों से

सभी मृतक एक ही गांव के दो परिवारों के थे. एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘मामलों के मद्देनजर राजौरी में चल प्रयोगशाला शुरू की गई है. इसके अतिरिक्त, मामलों और मौतों की जांच में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की सहायता के लिए विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम गठित की गई है.’

उपायुक्त ने किया गांव का दौरा

राजौरी जिले के उपायुक्त अभिषेक शर्मा ने सोमवार को बधाल गांव में जमीनी स्थिति का आंकलन करने के लिए कोटरंका का दौरा किया था. उन्होंने कहा कि यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि बीमारी किस तरह की फैल रही है. मोबाइल प्रयोगशाला की तैनाती इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि इससे तेजी से जांच और विश्लेषण में मदद मिलेगी. इससे बीमारी के और फैलने को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि घटना के मद्देनजर, राजौरी में एक जैव सुरक्षा स्तर 3 (बीएसएल-3) मोबाइल प्रयोगशाला भेजी गई है. इसके अतिरिक्त, मामलों और मौतों की जांच में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की सहायता के लिए विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम गठित की गई है.

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