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अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद से सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. इस गिरावट के कारण सोने के शौकिनों और निवेशकों के लिए यह एक बड़ा सवाल बन गया है: क्या सोने में और गिरावट आएगी, या अब कीमतें स्थिर हो जाएंगी?
अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की जीत के बाद अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने जैसी कीमती धातुओं की कीमतें घटने लगती हैं. यह एक सामान्य बाजार का नियम है. ट्रंप के विजयी होने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रति उम्मीदें बढ़ी हैं, जिससे निवेशक डॉलर में निवेश करने के लिए आकर्षित हो रहे हैं, और इसके साथ ही सोने की कीमतों में दबाव आया है.
गुरुवार को भारत में सोने की कीमतें 0.37% गिरकर 76,369 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं. पिछले दो दिनों में सोने के दाम में 2,100 रुपये की गिरावट आई है. वहीं, चांदी के दाम भी घटकर 90,601 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. यह गिरावट ट्रंप की जीत के कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते आई है.
गोल्ड के विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सोने की कीमतें 77,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे नहीं जातीं, तो गिरावट रुक सकती है. इसका मतलब यह है कि सोने का बाजार अभी सपोर्ट लेवल पर खड़ा है. यदि यह लेवल टूटता है, तो सोने की कीमतें और नीचे जा सकती हैं. लेकिन अगर यह लेवल बना रहता है, तो सोने में कुछ सुधार हो सकता है.
एलकेपी सिक्योरिटीज के जतीन त्रिवेदी का कहना है कि सोने की कीमतें फिलहाल 77,500 से 78,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच हो सकती हैं. हालांकि, सोने में थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली है क्योंकि इसकी कीमत ओवरसोल्ड (बहुत ज्यादा गिरने) स्थिति में पहुंच चुकी थी. लेकिन, अभी भी मंदी का रुझान जारी है, और इसका असर सोने की कीमतों पर देखा जा सकता है.
अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो आपको अब काफी सोच-समझकर कदम उठाने होंगे. फिलहाल सोने की कीमतें अस्थिर हैं और बाजार में गिरावट का रुझान बना हुआ है. निवेशकों को यह देखना होगा कि सोने की कीमतें सपोर्ट लेवल से नीचे न चली जाएं, क्योंकि तब और बड़ी गिरावट आ सकती है.
गौरतलब है कि अमेरिकी चुनावों के परिणामों के बाद सोने की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन यह भी जरूरी है कि निवेशक सपोर्ट लेवल को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय लें. वर्तमान में डॉलर की मजबूती और ट्रंप की जीत के कारण सोने में गिरावट आ रही है, लेकिन यह भी हो सकता है कि यह गिरावट स्थिर हो जाए और कीमतें फिर से उठने लगें.
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