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इंसान की खोपड़ी में खाते हैं खाना और पीते हैं पानी, जानिए 'कापालिक संप्रदाय' के बारे में

Know about 'Kapalik Sect': भारत में कई धर्मों और संप्रदायों के लो रहते हैं. यहां कई ऐसे रहस्यमयी संप्रदाय भी पाए जाते हैं जो आम दुनिया और समाज से कट के अपना जीवन जीते हैं. ऐसा ही एक संप्रदाय है 'कापालिक संप्रदाय'. आइये जानते इनके बारे में.

By Shivendra Rai | Updated: January 1, 2025 12:22 PM IST

'कापालिक संप्रदाय' के साधु भगवान शिव के उपासक हैं. तंत्र साधना में अपना जीवन बिताने वाले ये साधु इंसान की खोपड़ी में खाते-पीते हैं. ये हमेशा अपने साथ एक कपाल (मानव खोपड़ी) रखते हैं इसलिए इन्हें कापालिक कहा जाता है.

'कापालिक संप्रदाय' को तांत्रिक संप्रदाय कहा जाता है. पुराणों अनुसार इस मत को धनद या कुबेर ने शुरू किया था. कापालिकों का पूरा जीवन तंत्र साधना में बीतता है. इनका जीवन बेहद रहस्यमयी होता है.

कापालिक साधु मृत्यु का भय नहीं करते. ये इंसानी खोपड़ी में ही खाते और पीते हैं और हमेशा अपने पास नरमुंड रखते हैं. इन साधुओं के हमेशा अपने पास कपाल रखने के पीछे भी एक कहानी है.

माना जाता है कि कपाल रखकर ये साधु हमेशा याद करते हैं कि जो मस्तक कभी आदर का पात्र था उसकी कैसी दुर्गती हुई. इनके लिए मिट्टी के पात्र तथा कपाल में कोई फर्क नहीं होता.

'कापालिक संप्रदाय' के साधु जल्दी दिखाई नहीं देते. ये हिमालय की ऊंची गुफाओं और जंगलों में रहते हैं. कुंभ मेले के दौरान भी ये सामने आते हैं और फिर गायब हो जाते हैं. इनकी कोई पहचान नहीं होती.

'कापालिक संप्रदाय' के साधु का न कोई परिवार होता है न ही इन्हें किसी का मोह होता है. ये आम लोगों से नहीं मिलते जुलते. लेकिन, मानते हैं कि यदि कोई असली कापालिक साधु मिल गया और वह आपसे प्रसन्न हो गया तो समझों आपकी किस्मत बदल जाएगी. (सभी तस्वीरें एआई की मदद से बनाई गई हैं.)