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ओवर द टाइम (ओटीटी) प्लेटफॉर्म नेटफ़्लिक्स (Netflix) पर 25 साल पहले हुए 1999 के कंधार प्लेन हाईजैक की घटना पर ‘आईसी 814: द कंधार हाईजैक’ सीरीज आई है. डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की इस वेबसीरीज को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. यह विवाद किरदारों के नाम को लेकर हो रहा है, इसके लिए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेट प्रमुख को तलब किया. हालांकि, एक दिन बाद नेटफ्लिक्स की ओर से सरकार को यह आश्वासन दिया गया कि भारत के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर, प्लेटफॉर्म पर कंटेट अपलोड किए जाएंगे. वेब सीरीज को लेकर विवाद क्यों हो रहा है, ये तो हम सबने जान लिया. मगर अब आपका ये जानना जरूरी है कि, आखिर ‘आईसी 814: द कंधार हाईजैक’ क्या था.
आज से करीब 25 साल पहले, तारीख थी 24 दिसंबर, 1999- नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी-814 ने नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. मगर जैसे ही ये फ्लाइट हवा में पहुंची, विमान को हाईजैक कर लिया गया. फ्लाइट को शाम के समय नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचना था, लेकिन उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद ही उसके हाईजैक होने की जानकारी मिली.
आईसी-814 फ्लाइट को बंदूक की नोक पर दिल्ली की बजाए अमृतसर ले जाया गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि विमान में ईंधन (फ्यूल) खत्म हो रहा था, और आतंकियों का मकसद इसे पाकिस्तान ले जाना था. कुछ समय तक फ्लाइट अमृतसर में ही रुकी, मगर वो काम भी नहीं हो पाया जिसके लिए इसे उतारा गया था. फिर आंतकियों ने पायलट को विमान लाहौर लेकर जाने के निर्देश दिए.
लाहौर में जब फ्लाइट आईसी-814 को उतरने की अनुमति मांग गई, तो पाकिस्तान एटीसी ने उसे अस्वीकार कर दिया. फिर जैसे-तैसे विमान को उतरने की परमिशन मिली, और फ्यूल भरने के बाद विमान को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल मिन्हाद एयर बेस पर उतारा गया. जानकारी के अनुसार, फ्लाइट को जब हाईजैक किया गया था, तब उसमें 176 यात्री सवार थे…इनमें से कुछ विदेशी भी थे. अल मिन्हाद एयर बेस पर 27 यात्रियों को रिहा कर दिया गया, और यहां से विमान सीधे अफगानिस्तान के कंधार के लिए रवाना हुआ.
अब आती है मुद्दे की बात कि आखिर विमान को क्यों हाईजैक किया गया था? जानकारी के अनुसारस जिन आतंकियों ने फ्लाइट को हाईजैक किया था, वह सभी पाकिस्तानी थे. उनका मकसद था भारत की जेल में बंद मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर की रिहाई कराना. जिन आतंकियों ने प्लेन को हाईजैक किया था, उनके नाम कुछ इस तरह थे- इब्राहिम अतहर, शाहिद अख्तर सईद, सनी अहमद काजी, मिस्त्री जहूर इब्राहिम और शाकिर.
मगर ये सब इतना आसान कहा था? जनवरी 2000 की विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इन आतंकियों ने अपने असली नामों को छिपाया था, और काल्पनिक नाम इस्तेमाल किए थे. जो कुछ इस तरह थे- चीफ, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर. इनमें से दो नाम (भोला और शंकर) को लेकर ‘आईसी 814: द कंधार हाईजैक’ सीरीज का विरोध किया जा रहा है. हालांकि, नेटफ्लिक्स की ओर से सरकार को यह आश्वासन दिया गया कि भारत के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर, प्लेटफॉर्म पर कंटेट अपलोड किए जाएंगे.
आतंकियों द्वारा विमान को हाईजैक करने के बाद 25 और 26 दिसंबर, 1999 को भारत की ओर से बातचीत का दौर शुरु हुआ. 27 दिसंबर को भारत सरकार ने गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक काटजू की अध्यक्षता में एक टीम को कंधार के लिए रवाना किया. इसमें गृह मंत्रालय के अधिकारी अजीत डोभाल और सीडी सहाय भी शामिल थे. हाईजैक के लगभग आठ दिन के बाद यानि 31 दिसंबर, 1999 को विमान में सवार सभी नागरिकों को रिहा कर दिया गया.
मगर नागरिकों की रिहाई के बदले में आतंकियों ने मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर की रिहाई मांगी. जिसे भारत मना नहीं कर पाया, और उसे आतंकियों की रिहाई के बदले अपने नागरिक मिल गए. आपको बता दें कि जिस वक्त विमान हाईजैक हुआ था, उस समय भारत में एनडीए की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे. आतंकियों की रिहाई के लिए सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा था.
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी. उन्होंने 10 लोगों को आरोपी बनाया था, इनमें पांच अपहरणकर्ताओं सहित सात आरोपी अभी भी फरार हैं और उनके ठिकानों के बारे में आज तक पता नहीं लग पाया है.
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