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क्या FII भारतीय शेयर बाजार में बदलाव की शुरुआत कर रहे हैं? | Explained
FII भारतीय बाजार में वैल्यूएशन सुधार और विकास संभावना के कारण सक्रिय हो रहे हैं. नवंबर में प्राइमरी मार्केट में खरीदारी बढ़ी, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अस्थिरता बनी हुई है. स्थिरता की उम्मीद है.
हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली और खरीदारी के बीच झूलते नजर आए हैं. अक्टूबर में जहां उन्होंने 1,13,858 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की, वहीं नवंबर में यह घटकर 39,315 करोड़ रुपये पर आ गई. बाजार विशेषज्ञ इसे सुधार और आकर्षक वैल्यूएशन का नतीजा मान रहे हैं.
प्राइमरी मार्केट में खरीदारी बढ़ी
नवंबर में FII ने प्राइमरी मार्केट में 17,704 करोड़ रुपये की खरीदारी की. इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी पर भरोसा जता रहे हैं.
तीन दिनों की खरीदारी, फिर बिकवाली
23-25 नवंबर के बीच FII ने भारतीय बाजार में लगातार खरीदारी की. तीन दिनों में उन्होंने 11,100 करोड़ रुपये का निवेश किया, लेकिन उसके बाद दो दिनों में ही 16,139 करोड़ रुपये की इक्विटी बेच दी. यह अस्थिरता वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का संकेत देती है.
भारतीय बाजार में मजबूती के संकेत
शुक्रवार को भारतीय बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने जोरदार तेजी दर्ज की. सेंसेक्स 759.05 अंकों की उछाल के साथ 79,802.79 पर और निफ्टी 216.95 अंकों की बढ़त के साथ 24,131.10 पर बंद हुआ. विशेषज्ञों के अनुसार, यह बेहतर निवेशक भावना और लार्ज-कैप शेयरों के बेहतर प्रदर्शन का नतीजा है.
तकनीकी दृष्टिकोण: सतर्कता जरूरी
एंजेल वन के राजेश भोसले के अनुसार, बाजार तकनीकी रूप से कंसोलिडेशन फेज में बना हुआ है. व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे अधिक आक्रामक दांव लगाने से बचें और वैश्विक कारकों पर नजर रखें.
निकट भविष्य में स्थिरता की उम्मीद
पीएल कैपिटल-प्रभुदास लीलाधर के विक्रम कासट ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है. इससे बाजार में स्थिरता की संभावना है.
क्या यह बदलाव स्थायी होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि FII की गतिविधियों में सुधार भारतीय बाजार के प्रति सकारात्मक संकेत है. हालांकि, वैश्विक आर्थिक कारकों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति में बदलाव पर भी ध्यान देना जरूरी है.
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