Success Story: बचपन में पिता चल बसे, अपार दुखों के बावजूद नहीं मानी हार, आखिरकार भाई लेफ्टिनेंट और बहन बनीं जज

Success Story: पिता के बचपन में निधन के बाद मुश्किलों से भरा सफर शुरू हुआ, लेकिन नानी और मां के समर्थन से भाई-बहन ने हार नहीं मानी. अब भाई सेना में लेफ्टिनेंट और बहन जज बनकर मिसाल बने.

Published: December 19, 2024 3:30 PM IST

By Md. Raja Alam

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सक्सेस स्टोरी

Success Story: गया के नूतन नगर की शिवांगी और शिवम आनंद ने अपने संघर्षों को सफलता में बदलकर परिवार का नाम रोशन किया. बहन शिवांगी ने 32वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में पूरे बिहार में 11वां स्थान हासिल किया, जबकि भाई शिवम भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने. दोनों की सफलता परिवार और समाज के लिए प्रेरणा है. 15 साल पहले उनके पिता का निधन हो गया था, लेकिन नानी और मां के संस्कारों ने उन्हें टूटने नहीं दिया.

संघर्ष और शिक्षा की राह

शिवांगी और शिवम का सफर आसान नहीं था. पिता की मौत के बाद, उनकी मां श्वेता चौधरी ने ननिहाल लखीबाग, मानपुर में रहकर बच्चों को पाला. शिवांगी ने अपनी स्कूली शिक्षा गया के नाजेरथ अकादमी और मानव भारती से पूरी की. इसके बाद, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पांच वर्षीय बीए एलएलबी और दो वर्षीय एलएलएम की पढ़ाई पूरी की. शिवम ने भी नाजेरथ अकादमी से इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की और 2020 में एनडीए में चयनित हुए.

पहली कोशिश में मिली बड़ी सफलता

शिवांगी ने पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले ही प्रयास में बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की. वहीं, शिवम ने एनडीए में तीन साल की ट्रेनिंग खड़कवासला, पुणे में पूरी की और आईएमए देहरादून से पास आउट होकर लेफ्टिनेंट बने. 14 दिसंबर को पासिंग आउट परेड के बाद वे सेना का हिस्सा बने. दोनों भाई-बहन की उपलब्धियां परिवार के लिए गर्व का विषय हैं.

परिवार का अटूट समर्थन

दोनों बच्चों की सफलता के पीछे उनकी मां श्वेता चौधरी और नानी-नाना का विशेष योगदान है. मां ने सामाजिक उत्प्रेरक के रूप में काम करते हुए बच्चों की परवरिश की. नाना महेश चौधरी और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनका पूरा साथ दिया. परिवार के लिए यह पल खुशियों से भरा है, लेकिन बच्चों के पिता की कमी महसूस करते हुए परिवार भावुक भी हुआ. यह कहानी साबित करती है कि संघर्ष और संस्कार से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है.

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