UPSC Success Story: B.Tech के बाद बैंक में नौकरी करने को थी मजबूर, जॉब करते हुए की तैयारी, IPS बनकर रचा इतिहास

UPSC Success Story: क्या मजबूरी और सपनों के बीच संतुलन बनाना संभव है? बीटेक के बाद बैंक की नौकरी करने वाली शांभवी मिश्रा ने यही कर दिखाया. जॉब के साथ तैयारी करते हुए आईपीएस बनकर अपनी सफलता की कहानी लिखी.

Published: December 25, 2024 3:37 PM IST

By Md. Raja Alam

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आईपीएस सक्सेस स्टोरी

UPSC Success Story: उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की शांभवी मिश्रा की कहानी प्रेरणादायक है. छोटी जगह से होने के बावजूद उन्होंने 2018 में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना साकार किया. स्कूल में उनकी दिलचस्पी ह्यूमैनिटीज में थी, लेकिन उनकी तहसील में इस स्ट्रीम की सुविधा नहीं थी. मजबूरी में उन्होंने साइंस लेकर पढ़ाई की और बाद में बीटेक में एडमिशन लिया. बीटेक के तीसरे साल में उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की और अपनी मंजिल तय की.

नौकरी और पढ़ाई का संतुलन

बीटेक के बाद 2017 में शांभवी ने बैंक पीओ की नौकरी शुरू की. नौकरी के दौरान घर से बैंक तक 42 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था, जिसमें रोज़ 4 घंटे लगते थे. यह समय उन्होंने पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किया. रास्ते में अखबार पढ़ना और नोट्स रिवाइज़ करना उनकी दिनचर्या बन गया. नौकरी के साथ उनकी तैयारी मजबूत होती रही, और पहले अटेम्प्ट में उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स क्लियर किया. हालांकि, इंटरव्यू में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

2018 में मिली सफलता

2018 में शांभवी ने यूपीएससी परीक्षा में 199वीं रैंक हासिल कर आईपीएस का पद प्राप्त किया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. पहले अटेम्प्ट में फेल होने के बावजूद उनके पिता ने उन्हें प्रेरित किया. शांभवी ने ट्रेनिंग पूरी करने के बाद गुवाहाटी में एडीसीपी (सेंट्रल) के पद पर पोस्टिंग पाई. उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें एक सफल अधिकारी बनाया.

दूसरा प्रयास और बेहतर रैंक

2019 में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी शांभवी ने यूपीएससी का एक और अटेम्प्ट देने का फैसला किया. 2021 में उन्होंने फिर परीक्षा दी और 116वीं रैंक हासिल की. हालांकि, उन्हें फिर से आईपीएस कैडर ही मिला, लेकिन उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय और मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है. आज शांभवी मिश्रा की कहानी लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए प्रेरित करती है.

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