दान-पुण्य करना धर्म है या माता-पिता की सेवा करना? प्रेमानंद महाराज ने दिया जवाब

02 Jan, 2025

Shivendra Rai

प्रेमानंद महाराज के पास लोग अपनी जिज्ञासा और दुविधा लेकर आते हैं जिसका महाराज जी जवाब देते हैं.

प्रेमानंद जी महाराज से उनके एक भक्त ने पूछा कि असली धर्म क्या है, दान-पुण्य करना धर्म है या माता-पिता की सेवा करना?

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "चार धर्म हैं, लोकधर्म, वेदधर्म, भागवत धर्म और प्रेम धर्म."

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "लोकधर्म में सांसारिक रिश्ते नाते आते हैं. आप किसी के पुत्र हैं, किसी के भाई, किसी के पति तो किसी के पिता."

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "वेद धर्म के रास्ते पर चलकर जो सही से लोकधर्म का पालन करता है उसका भागवत धर्म में प्रवेश हो जाता है."

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "भागवत धर्म ही जीवन को मुक्ति की तरफ ले जाता है."

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "पहले लोक धर्म का सही से पालन करें, फिर आगे इसका त्याग कर दें."

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "लोकधर्म का पालन जरूर करना चाहिए, बिना लोक धर्म का पालन किए भागवत धर्म में प्रवेश नहीं हो सकता."

प्रेमानंद महाराज ने कहा- "जो लोकधर्म में भ्रष्ट हो जाएगा, अपने कर्तव्य सही से नहीं निभाएगा वह भगवान को नहीं प्राप्त कर सकता."

Thanks For Reading!

Next: इस दिन काले कपड़े पहनने से हो सकता है आपका भारी नुकसान

Find Out More