पितृदोष से बचने के लिए कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
पितृदोष का संबंध ज्योतिष में पूर्वजों की अशुभता या उनके आशीर्वाद की कमी से होता है.
से कुंडली में सूर्य, राहु या केतु की अशुभ स्थिति के रूप में देखा जाता है.
पितृदोष के कारण व्यक्ति को जीवन में बाधाएं, आर्थिक संकट, संतान की समस्याएं और मानसिक तनाव हो सकता है.
ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा कौन सा रत्न धारण करने से इस दोष को कम किया जा सकता है.
बता दें, रूबी (Ruby)
जिसे (माणिक्य) भी कहा जाता है. इस रत्न को पहनने से पितृ दोष को कम किया जा सकता है.
माणिक्य सूर्य को मजबूत बनाता है, जिससे पूर्वजों की कृपा मिलती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है.
कब पहनना चाहिए माणिक्य?- अगर कुंडली में-सूर्य राहु केतु की युति हो (ग्रहण योग).सूर्य द्वादश (12वें), अष्टम (8वें) या छठे (6वें) भाव में हो.
सूर्य नीच का हो (तुला राशि में)-पितृ दोष या पितृ ऋण का संकेत मिले.
कैसे पहनें माणिक्य (Ruby)?- धातु: सोना या तांबा।
उंगली: अनामिका (रिंग फिंगर)।
दिन: रविवार
विधान- रविवार को सूर्योदय के समय इसे पहनें.पहनने से पहले माणिक्य को गंगाजल, दूध और शहद से शुद्ध करें. "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें और फिर अंगूठी पहनें.
डिस्कलेमर- ये लेख सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे उपयोग में लाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.
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