संजीवनी बूटी लाने में हनुमान जी को कितना वक्त लगा था?
यह कथा रामायण के युद्धकांड से जुड़ी है. जब रावण के पुत्र मेघनाद ने युद्ध के दौरान लक्ष्मण पर शक्तिशाली शक्ति बाण चलाया, तो लक्ष्मण मूर्छित हो गए.
ऐसे में राजवैद्य ने लक्ष्मण को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने को कहा जो हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत पर उगती है. ये लंका से 5000 किलोमीटर दूर थी.
राजवैद्य ने ये भी कहा कि यह बूटी सूर्योदय से पहले लानी होगी, अन्यथा लक्ष्मण का जीवन बचाना असंभव होगा.
इस कार्य को करने के लिए प्रभु राम ने हनुमान जी को ये काम सौंपा. क्योंकि उनके उड़ने की गति तेज थी.
रामायण के अनुसार हनुमान जी ने तुरंत उड़ान भरी. रास्ते में उन्होंने कई बाधाएं पार कीं, जिनमें उन्होंने रावण के भेजे हुए कालनेमि राक्षस को भी मार गिराया.
जब हनुमानजी हिमालय पहुंचे, तो वे संजीवनी बूटी को पहचान नहीं सके. इसलिए वे पूरा पर्वत ही उठा लाए.
हनुमानजी ने रात के समय हिमालय से पर्वत उठाया और सूर्योदय से पहले वापस लौट आए.
कथा के अनुसार उन्हें संजीवनी बूटी लाने में दो घंटे का समय लगा.
सुषेण वैद्य ने संजीवनी बूटी से लक्ष्मण का उपचार किया और वे पुनः स्वस्थ हो गए.
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