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भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में अपनी मंदी को पीछे छोड़ने की उम्मीद कर रही है. सरकार और विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले साल वृद्धि दर में सुधार होगा. इसका मुख्य कारण मजबूत त्यौहारी गतिविधि और ग्रामीण मांग का बढ़ना है. हालांकि, पिछले साल की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि घटकर 5.4 प्रतिशत पर आ गई थी, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक “अस्थायी झटका” बताया है.
भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं, खासकर उच्च आवृत्ति संकेतकों से. रिजर्व बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सुधार की राह पर हैं. अगले वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है. इसके साथ ही, 2025 की पहली तिमाही में यह बढ़कर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
वृद्धि के साथ-साथ मुद्रास्फीति पर काबू पाना चुनौती है. 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना जताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक की नीति में बदलाव से आर्थिक सुधार को और बल मिल सकता है. फरवरी में केंद्रीय बैंक की बैठक के दौरान, नया गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण फैसले हो सकते हैं.
वैश्विक राजनीतिक संकट, खासकर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद, भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को विदेशों से आने वाली आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है.
आने वाले समय में निजी क्षेत्र को भी अपनी निवेश और खर्च को बढ़ाना होगा. वैश्विक अस्थिरता और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए, भारत के आर्थिक परिदृश्य में संभावनाएँ तो हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी बनी रहेंगी.
भारत सरकार वित्तीय विवेकशीलता के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में नए राजकोषीय उपायों की घोषणा हो सकती है. केंद्रीय सरकार का लक्ष्य है कि वह राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से कम रखे.
गौरतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए 2025 में वृद्धि की उम्मीदें हैं, लेकिन इसके लिए घरेलू और वैश्विक चुनौतियों से निपटना होगा. मुद्रास्फीति पर काबू पाना, ब्याज दरों में कटौती और निजी निवेश को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण कदम होंगे.
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