भारत में हर साल 30 मिलियन नए डीमैट खाते: महिला निवेशकों की संख्या भी बढ़ी!
भारत में हर साल कम से कम 30 मिलियन नए डीमैट खाते खुल रहे हैं, जो पूंजी बाजार में बढ़ती रुचि को दर्शाते हैं.
अब हर चार में से एक निवेशक महिला है, जो वित्तीय स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहे हैं.
वित्त वर्ष 2024 में भारत में कुल डीमैट खाते 150 मिलियन को पार कर गए हैं, जबकि 2014 में यह संख्या केवल 22 मिलियन थी.
2024 में नए डीमैट खातों की संख्या 40 मिलियन तक पहुँच सकती है.
दिल्ली, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जो राष्ट्रीय औसत 23.9% से अधिक है.
30 वर्ष से कम आयु के निवेशकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जो तकनीकी प्रगति और जानकारी की बढ़ती उपलब्धता के कारण संभव हुआ है.
एसआईपी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) में चार गुना वृद्धि हुई है, जिससे कुल योगदान लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है.
NSE का बाजार पूंजीकरण 6 गुना बढ़कर 441 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो भारतीय कंपनियों के बढ़ते निवेश को दर्शाता है.
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