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नई दिल्ली. टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ऑस्ट्रेलिया दौरे पर चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) जैसे अनुभवी और सॉलिड डिफेंस तकनीक में माहिर और भरोसेमंद बल्लेबाज की अहमियत को बखूबी जानते थे और इसलिए वह बार-बार चीफ सिलेक्टर से इस दाएं हाथ के बल्लेबाज को ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने की सिफारिश कर रहे थे. लेकिन सिलेक्शन कमेटी ने उनकी एक नहीं सुनी और अब मेलबर्न टेस्ट की हार के साथ उनकी उपयोगिता समझ आ रही है.
द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, गंभीर को पुजारा पर इतना भरोसा था कि जब भारतीय टीम ने कप्तान रोहित शर्मा के बगैर पर्थ टेस्ट में जीत भी दर्ज कर ली, तब भी वह सिलेक्टर्स से इस अनुभवी बल्लेबाज को बाकी बचे हुए दौरे पर भेजने की बात कह रहे थे. भारत का टॉप ऑर्डर इन दिनों लय से भटका हुआ है और ऑस्ट्रेलिया में पुजारा का रिकॉर्ड भी दमदार है, जिन्होंने अब तक यहां खेले कुल 11 टेस्ट में 47.28 के औसत से 993 रन बनाए हैं.
36 वर्षीय पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम चयन से पहले सौराष्ट्र के लिए खेलते हुए छत्तीसगढ़ के खिलाफ दोहरा शतक भी जमाया था. लेकिन चयनकर्ताओं को वह फिर भी प्रभावित नहीं कर पाए. भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसके घर में जो लगातार दो बार टेस्ट सीरीज जीती हैं उनमें पुजारा का योगदान अहम रहा था. लेकिन सीनियर खिलाड़ियों को छोड़कर युवाओं के कंधों पर आगे बढ़ने की चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट की सोच ने पुजारा की टीम में वापसी नहीं होने दी.
इन दिनों जब भारतीय टीम बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ संघर्ष कर रही है और यहां सीरीज जीत की हैट्रिक लगाने से वह चूक गई है, तब पूरी सीरीज के दौरान पुजारा बतौर एक्सपर्ट स्टार स्पोर्ट्स पर भारतीय टीम के खेल की समीक्षा और खिलाड़ियों को सलाह देते दिखाई दिए. भारत के कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने भी पुजारा को ऑस्ट्रेलिया भेजने का समर्थन किया था. इनमें पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह भी एक थे.
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