श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्ण के नागास्त्र से कैसे बचाया?

30 Dec, 2024

Manoj Yadav

कर्ण और अर्जुन के बीच युद्ध चल रहा था. कर्ण कौरव सेना के सेनापति थे, और अर्जुन अपने धनुष गांडीव से उनके हर बाण का प्रभावी सामना कर रहे थे.

अर्जुन ने अपने अद्वितीय कौशल से कर्ण के हर बाण को काट दिया और उनके शरीर पर गंभीर आघात करने लगे.

अर्जुन को हराने के लिए कर्ण ने अपनी तरकश से एक विशेष बाण निकाला, जिसे "सर्पमुखी बाण" कहा जाता है.

यह सर्पमुखी बाण नागराज अश्वसेन द्वारा निर्देशित था. अश्वसेन, अर्जुन से अपने पिता की मृत्यु का बदला लेना चाहता था.

यह बाण असाधारण था और अपनी गति, शक्ति और दिशा बदलने की क्षमता रखता था.

कर्ण को यकीन था कि यह बाण अर्जुन के जीवन का अंत कर देगा. उन्होंने पूरी शक्ति से इसे छोड़ा.

अर्जुन ने अपने गुरु द्रोणाचार्य और श्रीकृष्ण से मिली शिक्षाओं के बल पर अधिकांश घातक अस्त्रों को नष्ट किया था.

जैसे ही कर्ण ने सर्पमुखी बाण छोड़ा, श्रीकृष्ण ने अर्जुन के रथ के पहियों को जमीन में गड़ा दिया, जिससे बाण अर्जुन के सिर के बजाय मुकुट को छूकर निकल गया.

सर्पमुखी बाण अर्जुन के मुकुट को उड़ा ले गया, लेकिन अर्जुन बच गए.

नागराज अश्वसेन ने कर्ण पर क्रोध व्यक्त किया क्योंकि उन्होंने बाण को दोबारा चलाने का मौका नहीं दिया.

कर्ण ने अश्वसेन के आग्रह को ठुकरा दिया और कहा कि वह किसी नाग या अन्य सहायता का सहारा नहीं लेंगे.

अर्जुन ने अपनी धनुर्विद्या से कर्ण पर हावी होकर उनका मुकाबला जारी रखा, और अंततः युद्ध के निर्णायक क्षणों में कर्ण का वध हुआ.

यह घटना महाभारत के युद्ध के उन महत्वपूर्ण पलों में से एक है, जो श्रीकृष्ण की बुद्धिमानी और अर्जुन के अद्वितीय कौशल को दर्शाती है.

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Next: अगर कर्ण के पास कवच और कुण्डल होते तो महाभारत युद्ध का क्या परिणाम होता?

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