अर्थी ले जाते समय क्यों बोलते हैं 'राम नाम सत्य है'?

30 Dec, 2024

Shilpi Singh

आपने ये भी सुना होगा कि शुभ कार्यों के दौरान 'राम नाम सत्य है' नहीं बोला जाता. ऐसा करने पर आपको डाट भी पड़ सकती है.

किसी अर्थी को जाते देखा होगा तो शव को ले जाते लोगों द्वारा 'राम नाम सत्य है' बोलते सुना होगा.

आपने ये भी सुना होगा कि शुभ कार्यों के दौरान 'राम नाम सत्य है' नहीं बोला जाता. ऐसा करने पर आपको डाट भी पड़ सकती है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि शव यात्रा के दौरान 'राम नाम सत्य है' क्यों बोला जाता है?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आखिरी समय में इंसान को राम नाम जप करना चाहिए.

माना जाता है कि भगवान राम का नाम आखिरी समय पर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. दशरथ ने भी मरते समय राम-राम बोलकर मोक्ष की प्राप्ति की थी.

कई धर्म ग्रंथों में 'राम' का नाम लेने के पीछे अलग-अलग तर्क दिए गए हैं. शास्त्रों के अनुसार मृत व्यक्ति के शव में कोई प्रेत आत्मा का प्रवेश ना हो इसलिए 'राम' का नाम जपते हैं.

ऐसा भी कहा जाता है कि व्यक्ति के मरने के बाद उसके शरीर के कई अंग धीरे-धीरे मरते हैं, जिनमें से एक कान है.

शव यात्रा के दौरान कानों में राम का नाम पड़े और शख्स को मुक्ति मिले, इस वजह से भी 'राम नाम सत्य है' का उच्चारण किया जाता है.

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