'गैर-हिंदुओं की दुकानों को महाकुंभ से रखें दूर', महंत ने दिया मेले की सुरक्षा और पवित्रता का हवाला, कहा- अगर ऐसा नहीं हुआ तो...
Maha Kumbh 2025 : महंत रवींद्र पुरी ने आगे कहा, 'हमने कहा है कि चाय की दुकानों, जूस की दुकानों और फूलों की दुकानों को उनके लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.'
Updated Date:January 1, 2025 3:54 PM IST
By Akarsh Shukla Edited By Akarsh Shukla
Maha Kumbh 2025 : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 12 वर्ष बाद लगने जा रहे महाकुंभ मेले की तैयारियां जोरों-शोरों से जारी हैं. प्रयागराज की सड़कें रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा रही हैं, इस बार के कुंभ मेले में देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की उम्मीद है. देश में धर्म-कर्म का कार्यक्रम हो और कोई विवादित बयान सामने ना आए, ऐसा कैसे हो सकता है. कुंभ मेले में आने वाले सैकड़ों नागा बाबाओं की ओर से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत रवींद्र पुरी ने बुधवार को एक ऐसा बयान दिया, जिसे लेकर अब वो सुर्खियों में आ गए हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ-2025 में गैर-हिंदुओं को दुकानें लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
'थूकेंगे, पेशाब करेंगे'
महंत रवींद्र पुरी ने आगे कहा, 'हमने कहा है कि चाय की दुकानों, जूस की दुकानों और फूलों की दुकानों को उनके लिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. अगर इन्हें ये दुकानें दे दी जाएं तो ये थूकेंगे, पेशाब करेंगे और हमारे नागा साधु कार्रवाई करने पर मजबूर हो जाएंगे. अगर ऐसी कोई घटना होती है और किसी को चोट पहुंचती है तो इससे दुनिया भर में गलत संदेश जाएगा. हमारा मेला सुंदर, स्वच्छ, भव्य, दिव्य और शांतिपूर्ण होना चाहिए. कार्यक्रम की सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं को दूर रखना आवश्यक है.
PM मोदी ने दिया था एकता का संदेश
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष के अपने अंतिम मन की बात एपिसोड में देश में एकता और भाईचारे का आह्वान करने के दो दिन बाद आया है, और उन्होंने लोगों से 'समाज में विभाजन और नफरत की भावना को खत्म करने' का आग्रह किया. आगामी कुम्भ मेला अनेकता में एकता का अनूठा दृश्य प्रस्तुत करता है. उन्होंने आध्यात्मिक उत्सव को भारत की विविधता की अभिव्यक्ति के रूप में सराहा, जहां किसी के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं है और सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'महाकुंभ की विशेषता केवल इसकी विशालता में नहीं है. कुंभ की खासियत इसकी विविधता में भी है. इस आयोजन में करोड़ों लोग जुटते हैं. लाखों साधु-संत, हजारों परंपराएं, सैकड़ों पंथ, कई अखाड़े, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनता है. कहीं कोई भेदभाव नहीं, कोई बड़ा नहीं, कोई छोटा नहीं. विविधता में एकता का ऐसा दृश्य दुनिया में कहीं और नहीं देखा जाएगा.
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Published Date:January 1, 2025 3:54 PM IST
Updated Date:January 1, 2025 3:54 PM IST