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AC Coach Blankets : इंडियन रेलवे के एसी कोच में मिलने वाले ब्लैंकेट यानी कंबलों की सफाई को लेकर बीते दिनों केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक हैरान करने वाली जानकारी दी थी. अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि ट्रेनों में मिलने वाले कंबलों को महीने में एक बार धुला जाता है. उनके इस बयान से भारतीय रेलवे और सरकार की काफी फजीहत हुई, जिसके बाद अब बड़ा फैसला लिया गया है. कंबलों की गुणवत्ता और स्वच्छता पर बढ़ती चिंताओं के बीच उत्तर रेलवे ने धुलाई के नियमों ने बदलाव का ऐलान किया है. अब कंबलों को एक महीने पर नहीं, बल्कि हर 15 दिन पर धुला जाएगा.
इसके अलावा कंबलों को हर पखवाड़े गर्म नेफथलीन वाष्प का उपयोग करके उन्हें कीटाणुरहित किया जाएगा. भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए जम्मू और डिब्रूगढ़ राजधानी ट्रेनों में यूवी रोबोटिक सैनिटाइजेशन पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है. इस तकनीक में पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश का उपयोग किया जाएगा, जो कंबलों को कीटाणुरहित करने में मदद करेगा. उत्तर रेलवे के प्रवक्ता हिमांशु शेखर ने बताया कि यह प्रक्रिया प्रत्येक यात्रा के बाद की जाएगी, जिससे सफाई और हाइजीन का स्तर और भी बेहतर होगा. रेलवे के मुताबिक, कंबलों को पहले हर 2-3 महीने में धोया जाता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया 15 दिनों में एक बार अनिवार्य कर दी गई है.
कंबलों को गर्म नेफथलीन वाष्प और मशीनीकृत लॉन्ड्रियों में धोने का काम किया जाता है. इसके बाद इन्हें ‘व्हाइटोमीटर टेस्ट’ से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी सफाई सुनिश्चित होती है. भारतीय रेलवे रोजाना 6 लाख से ज्यादा कंबल वितरित करता है, जिसमें उत्तरी रेलवे अकेले 1 लाख कंबल संभालता है. यह कदम यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. अब यात्री निश्चिंत होकर सफर कर सकते हैं, क्योंकि रेलवे स्वच्छता के स्तर को लगातार सुधारने में जुटा है. भारतीय रेलवे ने सफाई और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए कंबलों की धुलाई के मानकों में बड़ा सुधार किया है. उत्तर रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार, 2010 से पहले ऊनी कंबलों को हर 2-3 महीने में एक बार धोया जाता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया हर 15 दिनों में अनिवार्य रूप से की जाती है.
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