Signs And Symptoms Of Anxiety In Children And How To Treat Naturally In Hindi
बच्चों में एंग्जायटी होने पर दिखाई दे सकते हैं ये लक्षण, Parents भूलकर भी न करें इग्नोर
Bachcho Me Anxiety ke Lakshan: एंग्जायटी या तनाव जैसी मानसिक स्थितियां सिर्फ वयस्कों में ही नहीं, बल्कि बच्चों में देखने को मिल सकती है. ऐसे में इसके लक्षण समय रहते पहचान लेना बेहद जरूरी है.
Signs Of Anxiety In Kids: एंग्जायटी (चिंता) एक सामान्य मानवीय अनुभव है, जो भविष्य की चिंताओं या संभावित खतरों के बारे में ज्यादा सोचने और घबराहट की भावना से जुड़ा होता है. यह शारीरिक और भावनात्मक लक्षणों का संकेत हो सकता है, जो लाइफस्टाइल पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है. एंग्जायटी या तनाव जैसी मानसिक स्थितियां सिर्फ वयस्कों में ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी देखने को मिल सकती है.
कई बच्चे डर, चिंता और घबराहट जैसी स्थितियों से गुजर रहे होते हैं. इसके कारण वे उदासी और निराशा महसूस करते हैं. हालांकि, डर और चिंता का लक्षण बच्चों में दिखना आम बात है, लेकिन यह स्थति लगातार दिखाई देने पर चिंता या डिप्रेशन का कारण बन सकती है. ऐसे में बच्चों में दिखाई देने वाले इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें.
बच्चों में एंग्जायटी के लक्षण
चिड़चिड़ापन, क्रोध, चिंता या डर की स्थिति दिखाई देना
अलगाव या अकेले रहना पसंद करना
गलतियां करने का डर महसूस होना
दुखी या उदास महसूस करना
आत्मविश्वास में कमी
एकाग्रता में कठिनाई
स्कूल जाने में अनिच्छा
दैनिक गतिविधियों में ध्यान और रुचि की कमी
थकान, सिरदर्द, पेट दर्द या मांसपेशियों में तनाव
नींद में परेशानी और बुरे सपने के साथ जागना
भूख में बदलाव
तेज दिल की धड़कन
पसीना आना या कांपना
कैसे करें माता-पिता अपने बच्चे की मदद?
अपने बच्चे को समझने की कोशिश करें. बच्चे को विश्वास दिलाएं की आप उसके साथ हैं.
एंग्जायटी से उबरने में समय लगता है. धैर्य रखें और अपने बच्चे को धीरे-धीरे प्रगति करने में मदद करें.
बच्चे से उनकी चिंता के बारे में खुलकर बात करें. उन्हें बताएं कि वे सुरक्षित हैं और आप उनकी मदद करने के लिए मौजूद हैं.
यह जानने की कोशिश करें कि आपके बच्चे को क्या चिंता है. उनकी चिंताओं के बारे में जानने से आप उन्हें बेहतर ढंग से समझने और उनका सामना करने में मदद करने में सक्षम होंगे.
अपने बच्चे के लिए घर पर एक सुरक्षित और शांत वातावरण बनाएं.
बच्चे को पर्याप्त नींद, हेल्दी खाना और रोजाना एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित करें.
अगर आपके बच्चे की चिंता गंभीर है या उसकी लाइफस्टाइल में परेशानी पैदा कर रही है, तो डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से मदद लेना जरूरी है.
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे केवल सुझाव के तौर पर लें. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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