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दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अरविंद केजरीवाल के हालिया बयान को लेकर मुख्यमंत्री आतिशी को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें एलजी ने केजरीवाल पर आरोप लगाया है, कि उन्होंने आतिशी को एक अस्थायी ‘काम चलाऊ’ मुख्यमंत्री कहा. उपराज्यपाल ने आगे कहा, कि मुझे बहुत आपत्तिजनक लगा और मैं इससे आहत हुआ. यह न केवल आपका अपमान था, बल्कि आपकी नियोक्ता महामहिम भारत की राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधि के रूप में, मेरा भी अपमान था.
एलजी ने सोमवार को आतिशी को चिट्ठी लिखकर कहा, सर्वप्रथम मैं आपको आगामी नववर्ष 2025 के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं. मेरी कामना है कि आप सदैव स्वस्थ रहें और प्रगति के पथ पर अग्रसर हों. आपको मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के अवसर पर भी मैंने आपको हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दी थी और तब से अब तक की अवधि में, मैंने अपने ढाई साल के कार्यकाल में पहली बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति को मुख्यमंत्री का काम करते देखा.
उन्होंने चिट्ठी में आगे लिखा कि आपके पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री के पास सरकार का एक भी विभाग नहीं था और न ही वह फाइलों पर हस्ताक्षर किया करते थे. वहीं, आपने अनेक विभागों का दायित्व लेते हुए प्रशासन के विभिन्न मुद्दों पर काम करने का प्रयास किया. परंतु, कुछ दिन पूर्व आपके पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मीडिया में आपको सार्वजनिक रूप से एक अस्थायी काम चलाऊ मुख्यमंत्री घोषित किया जाना, मुझे बहुत आपत्तिजनक लगा और मैं इससे आहत हुआ.
यह न केवल आपका अपमान था, बल्कि आपकी नियोक्ता महामहिम भारत की राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधि के रूप में, मेरा भी अपमान था. अस्थायी अथवा काम चलाऊ मुख्यमंत्री की जो सार्वजनिक व्याख्या केजरीवाल ने की, उसका कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है. यह बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा रचित संविधान में निहित लोकतांत्रिक भावना और मूल्यों की निंदनीय अवहेलना भी है.
वीके सक्सेना ने आगे लिखा, यह सर्वविदित है कि आपको किन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री बनाया गया. पिछले 10 सालों में यमुना की बदतर हालत हो या पीने के पानी की भयंकर कमी, कचरे के पहाड़ों का मुद्दा या औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, सड़कों और सीवर लाइन की दुर्दशा हो या स्वास्थ्य की चरमराती व्यवस्था, अनधिकृत कॉलोनियों में सुविधाओं का घोर अभाव हो या झुग्गी बस्तियों में नारकीय जीवन, एक मुख्यमंत्री द्वारा, जिसको अस्थायी और काम चलाऊ घोषित किया जा चुका हो, तीन-चार महीने में कुछ भी कर पाना कितना संभव है, यह सभी जानते हैं.
इन क्षेत्रों में अपनी विफलताओं को आपके नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है. मगर मुख्यमंत्री के रूप में अब इन सभी क्षेत्रों में विफलताओं की ज़िम्मेदारी आपकी ही मानी जाएंगी. जिस प्रकार से केजरीवाल द्वारा, आपकी उपस्थिति में, अनधिकृत रूप से वरिष्ठ नागरिकों एवं मुख्यमंत्री के नाम पर ही महिलाओं संबंधित योजना की हवाई घोषणाएं की जा रही हैं. इससे मुख्यमंत्री के पद तथा मंत्री परिषद की गरिमा भी धूमिल हुई है.
(इनपुट-एजेंसी के साथ)