25 साल पहले परिवार ने कर दिया था अंतिम संस्कार, अब वापस लौट आई 'मर चुकी महिला', जानिए पूरा मामला

सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, साकम्मा अब अधिकारियों के साथ कर्नाटक वापस जा रही हैं. वह चंडीगढ़ से हवाई यात्रा करके अपने परिवार से एक लंबी और कठिन यात्रा के बाद फिर से मिलेंगी.

Updated: December 25, 2024 1:57 PM IST

By Shivendra Rai

( प्रतीकात्मक तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है)
( प्रतीकात्मक तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है)

जिस महिला को परिवार ने मरा हुआ मानकर 25 साल पहले अंतिम संस्कार तक कर दिया था वो अचानक लौट आई. ये कहानी है कर्नाटक की महिला साकम्मा की.

पच्चीस साल पहले साकम्मा अपने घर से भटक गई और फिर कभी लौट कर घर नहीं जा पाईं. परिवार ने कुछ समय तक खोजा लेकिन फिर हार मानकर उन्हें मरा हुआ मान लिया और अंतिम संस्कार तक कर दिया.

कर्नाटक में खोने के बाद भटकते हुए साकम्मा हिमाचल प्रदेश पहुंच गईं. वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहीं थी और कन्नड़ के अलावा किसी भी अन्य भाषा में बात करने में सक्षम नहीं थीं. इस कारण वह उत्तर भारत से फिर कभी दक्षिण भारत नहीं जा सकीं. साकम्मा की कहानी में मोड़ आया साल 2018 में. 2018 में, वह एक परित्यक्त अवस्था में मिली और मंडी जिले के सुंदरनगर में वृद्ध आश्रम भंगरोटू में लाई गई.

सालों तक यह वृद्धाश्रम ही उनका घर रहा. उनका अतीत उनके आस-पास के सभी लोगों के लिए एक रहस्य बना रहा. लेकिन,  हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला प्रशासन के अथक प्रयासों की बदौलत, साकम्मा आखिरकार अपने परिवार से मिल गई हैं.

साकम्मा की कहानी में महत्वपूर्ण मोड़ 18 दिसंबर, 2024 को आया, जब एडीसी मंडी रोहित राठौर नियमित निरीक्षण के तहत वृद्धाश्रम गए. उन्होंने वहां मौजूद लोगों से बातचीत की तो साकम्मा के बारे में पता चला. हालांकि भाषा की बाधा ने एक बड़ी चुनौती पेश की. रोहित राठौर ने कर्नाटक की मूल निवासी और वर्तमान में एसडीएम पालमपुर के रूप में तैनात आईएएस अधिकारी नेत्रा मैती से संपर्क किया. कन्नड़ में साकम्मा से फ़ोन पर बात करते हुए मैती ने उनके अतीत के बारे में जानकारी हासिल की.

इस बीच परिवार को सालों पहले एक दुर्घटना में एक क्षत-विक्षत शव मिला, तो उन्होंने गलती से उसे साकम्मा का शव मान लिया. उसका अंतिम संस्कार किया गया, और उसकी तस्वीर पर माला चढ़ाई गई.

आईएएस अधिकारी नेत्रा मैती को मिली जानकारी के आधार पर साकम्मा के परिवार का पता लगाने के लिए कोशिश शुरू की गई.प्रशासन ने मंडी में सेवारत कर्नाटक के एक अन्य मूल निवासी आईपीएस प्रोबेशनर रवि नंदन की मदद ली. नंदन आश्रम गए, साकम्मा का कन्नड़ में बोलते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया और इसे कर्नाटक सरकार के साथ साझा किया.

वीडियो सकम्मा के परिवार की पहचान करने में सहायक साबित हुआ. जब यह खबर उनके पास पहुंची, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं था. हालांकि यह पुनर्मिलन कुछ कड़वी सच्चाइयों के साथ सामने आया. साकम्मा के पति का निधन हो चुका था और उन्हें याद आने वाले “छोटे बच्चे” अब वयस्क हो चुके थे, विवाहित थे और खुद माता-पिता बन चुके थे.

सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, साकम्मा अब अधिकारियों के साथ कर्नाटक वापस जा रही हैं. वह चंडीगढ़ से हवाई यात्रा करके अपने परिवार से एक लंबी और कठिन यात्रा के बाद फिर से मिलेंगी.

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.