डायबिटीज से बचना है तो खाने में तुरंत शामिल करें ये चीजें, यहां मरीजों का होता है मुफ्त इलाज; 'अम्मा' हैं एक बड़े अभियान का हिस्सा

Diabetes Free Treatment : कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर में मधुसूदन साई आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सेंटर में किसी भी बीमारी का इलाज मुफ्त में किया जाता है. इस पूरे हॉस्पिटल की खासियत ये है कि यहां कैश काउंटर नहीं है.

Updated Date:January 2, 2025 12:27 PM IST

By Sushant Mohan Edited By Akarsh Shukla

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क्या आप जानते हैं कि मोटे लोग अगर डायबिटीज के मरीज हैं और वो इंसुलिन ले रहे हैं तो वो उनपर उतनी असर नहीं करती है जितनी एक नॉर्मल वजन वाले मरीजों पर काम करती है. या फिर क्या आपको ये पता है कि मोटा अनाज आपके शुगर लेवल को मैनेज करने में कितनी अहम रोल निभाता है. खाने में दाल या प्रोटीन युक्त खाना न खाने से भी डायबिटीज के खतरे बढ़ जाते हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च डायबिटीज स्टडी के अनुसार करीब 11 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं बता दें कि दुनिया के आधे से अधिक डायबिटीज के मामले हमारे देश में हैं.

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भारत में डायबिटीज महामारी की तरह फैल रही है और इसका मुख्य कारण भोजन में प्रोटीन और न्यूट्रीशन की कमी है. हालांकि यह बीमारी हेरेडिट्री भी होती है. ऐसे में अगर आपको यह पता चले कि डायबिटीज को लेकर अवेयरनेस फैलाने के लिए 83 वर्षीय आशा दामोदरन ने कई साल दे दिए हैं और वो भी बिना सैलरी के 8-8 घंटे मरीज देख रही हैं तो कैसा लगेगा. वह न केवल लोगों का इलाज मुफ्त में कर रही हैं और इसके लिए कोई फीस भी नहीं लेती हैं. पूरा हॉस्पिटल और गांव उन्हें अम्मा बुलाता है.

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कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर में मधुसूदन साई आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सेंटर में किसी भी बीमारी का इलाज मुफ्त में किया जाता है. इस पूरे हॉस्पिटल की खासियत ये है कि यहां कैश काउंटर ही नहीं है. इसी अस्पताल में हमने मुलाकात की 83 वर्षीय आशा दामोदरन से. डॉ. आशा ने भाभा एटमिक रिसर्च सेंटर में भी काम किया है. 2002 से वो मुंबई के कई ट्राइबल इलाकों में काम करती थीं, लेकिन 2020 से वो कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर में मधुसूदन साई आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सेंटर में हर दिन हजारों मरीजों का मुफ्त में इलाज कर रही हैं. वह कहती हैं कि दवाएं इतनी महंगी है और डायबिटीज का इलाज इतना महंगा है कि गरीब लोगों की जेब इसे एफोर्ड नहीं कर पाती है. ऐसे में मधुसूदन साई आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान सेंटर में मुफ्त में किया जा रहा इलाज मरीजों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.

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Type-1 Diabetes भारत में है अनकॉमन

डॉ. आशा ने बताया कि डायबिटीज की बड़ी वजह लोगों का पोषणयुक्त भोजन नहीं करना है. वह बताती हैं कि अक्सर गांव के लोग चावल खाते हैं और जिससे बड़ी संख्या में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. इसका बड़ा कारण उन्होंने पाया है मिलेट्स और प्रोटीन का भोजन में शामिल न होना. उन्होंने बताया कि भारत में टाइप 1 डायबिटीज बहुत अधिक नहीं है. बता दें कि टाइप वन डायबिटीज बच्चों में होती है.

Diabetes के मरीजों को सलाह

डॉ. आशा ने बताया कि डायबिटीज के मरीजों को कम से कम आधे घंटे वॉक जरूर करना चाहिए. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि अगर डायबिटीज का मरीज मोटा भी है तो उसे स्वस्थ और अपने मशल्स को मजबूत बनाए रखने के लिए करीब एक घंटे वॉक करना चाहिए. उन्होंने बताया कि मोटे लोगों में इंसूलिन की दवा बहुत तेजी से असर नहीं करती है इसलिए उन्हें ज्यादा एक्सरसाइज की जरूरत होती है.

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Published Date:January 2, 2025 11:43 AM IST

Updated Date:January 2, 2025 12:27 PM IST